क्या आप भी अपने सबसे करीबी इंसान को परखने की भूल कर रहे हैं?

 "जिंदगी में अगर किसी रिश्ते को लंबे समय तक बनाए रखना चाहते हो, तो उस पर भरोसा करना सीखो, उसका इम्तिहान लेना नहीं। क्योंकि जो रिश्ता कसौटी पर कसने से साबित हो, वो रिश्ता नहीं, महज़ एक सौदा होता है।हर इंसान हर वक्त आपकी उम्मीदों पर खरा उतरे, यह ज़रूरी नहीं। किसी की लाचारी को उसका धोखा समझने की भूल मत करना... क्योंकि कड़वी सच्चाई यही है कि परखने की ज़िद में अक्सर सबसे प्यारे अपने भी हाथ से छूट जाते हैं।"

एक झूठी परीक्षा... और खत्म हो गया सालों पुराना रिश्ता!»

"जिंदगी में अगर किसी रिश्ते को बनाए रखना चाहते हो, तो उस पर भरोसा करना सीखो, उसका इम्तिहान लेना नहीं। क्योंकि जो रिश्ता कसौटी पर कसने से साबित हो, वो रिश्ता नहीं, महज़ एक सौदा होता है..."

 

एक छोटे से शहर में राघव और आनंद नाम के दो बचपन के दोस्त रहते थे। दोनों की दोस्ती की मिसाल पूरे शहर में दी जाती थी—साथ पढ़े, साथ बढ़े और हर सुख-दुख में एक-दूसरे के ढाल बने रहे।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, राघव के मन में एक अनजाना डर और शक घर करने लगा। उसे लगने लगा कि क्या आनंद सच में उसका उतना ही सगा है, या यह सिर्फ वक्त का दिखावा है? एक दिन राघव ने अपने दादाजी से कहा, "दादाजी, मैं आनंद की सच्ची दोस्ती को आज़माना चाहता हूँ। मैं देखना चाहता हूँ कि मुसीबत पड़ने पर वह मेरे लिए किस हद तक जा सकता है।"

दादाजी ने गहरी सांस ली और मुस्कुराकर बोले, "बेटा, परखना मत, परखने में कोई अपना नहीं रहता। रिश्ते भरोसे पर टिकते हैं, इम्तिहानों पर नहीं।"

लेकिन राघव नहीं माना। उसने एक योजना बनाई।

रात के समय राघव बदहवास हालत में आनंद के घर पहुँचा। उसके कपड़ों पर लाल रंग लगा था। उसने आनंद से कहा, "आनंद, मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है! गुस्से में एक आदमी से मेरी हाथापाई हो गई और वह अब नहीं रहा। पुलिस मेरे पीछे है, मुझे तुरंत शहर से बाहर भागने के लिए पचास हजार रुपये और तेरी गाड़ी चाहिए!"

आनंद ने राघव को देखा। उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रही थीं। आनंद कुछ पल के लिए चुप हो गया। उस वक्त आनंद के घर में उसकी माँ बहुत बीमार थीं और उसने वे पचास हजार रुपये अपनी माँ के अस्पताल के बिल के लिए जोड़कर रखे थे।

आनंद ने मन ही मन सोचा—'अगर मैं इसे गाड़ी और पैसे दे दूँगा, तो मेरी माँ के इलाज में देर हो जाएगी। और अगर पुलिस को पता चला कि मैंने एक अपराधी की मदद की है, तो मेरा पूरा परिवार तबाह हो जाएगा।'

आनंद कांपते हाथों से बोला, "राघव... तू पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दे। मैं अच्छे वकील का इंतज़ाम करता हूँ। लेकिन मैं इस तरह कानून तोड़कर भागने में तेरी मदद नहीं कर सकता..."

राघव यह सुनते ही हंस पड़ा और अपने कपड़ों से लाल रंग पोंछते हुए बोला, "देखा आनंद! तू मेरा सच्चा दोस्त नहीं है! मैं तो बस तेरी परीक्षा ले रहा था। तू मेरी मुसीबत में काम नहीं आया!"

राघव यह कहकर गुस्से में वहाँ से चला गया। उसे लगा कि उसने अपने दोस्त का असली चेहरा देख लिया है।

अगले ही दिन, राघव को पता चला कि आनंद की माँ की तबीयत बहुत बिगड़ गई थी और आनंद उस रात अपने परिवार की सुरक्षा और माँ की साँसों के बीच झूल रहा था। जब आनंद को पता चला कि राघव ने सिर्फ उसकी 'परीक्षा' लेने के लिए इतना बड़ा नाटक किया, तो उसका दिल पूरी तरह टूट गया।

आनंद ने राघव से कोई झगड़ा नहीं किया, लेकिन उसने राघव से हमेशा के लिए दूरी बना ली। जिस दोस्त ने उस पर भरोसा करने के बजाय उसकी लाचारी का इम्तिहान लिया था, उनके बीच का वह बेफिक्र अपनापन हमेशा के लिए खत्म हो गया।

राघव को तब दादाजी की बात समझ आई। उसने आनंद को परखा तो ज़रूर, लेकिन उस एक परख के चक्कर में उसने अपना सबसे सच्चा दोस्त हमेशा के लिए खो दिया।

हर इंसान की अपनी मजबूरियाँ और परिस्थितियाँ होती हैं। जब हम किसी को परखते हैं, तो हम उसे अपनी शर्तों पर तोलते हैं। अपनों को परखा नहीं, समझा जाता है।

सोशल मीडिया के दौर में आज लोग रील्स और वीडियोज़ से इन्फ्लुएंस होकर अपने रियल-लाइफ रिश्तों में बहुत जल्दी धारणाएँ (assumptions) बना लेते हैं और अपनों को रेड/ग्रीन फ्लैग्स की कसौटी पर परखने लगते हैं।दोस्तों, आज की इस डिजिटल दुनिया में एक बात हमेशा याद रखना..."

"आजकल हम सोशल मीडिया के 30-सेकंड के रील्स, 'रेड फ्लैग' और 'ग्रीन फ्लैग' के ट्रेंड्स से इतने इन्फ्लुएंस हो चुके हैं कि असल ज़िंदगी के रिश्तों को भी काल्पनिक पैमानों पर परखने लगे हैं। पर याद रखिए, रील और रियल लाइफ में बहुत फर्क होता है। सोशल मीडिया के ट्रेंड देखकर अपनों का इम्तिहान लेना बंद कीजिए... क्योंकि फिल्टर सिर्फ फोटो में अच्छे लगते हैं, रिश्तों में नहीं।"

Manu....... 

 

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शत्रुता से परे धर्म जब रावण बना राम जी का पंडित क्यों भगवान राम के यज्ञ के पुरोहित बने रावण?

दौलत और ताकत से क्यों नहीं मिलता सुकून?

अष्ट सिद्धि नव निधि के दाता जानिए हनुमान जी की 8 अलौकिक शक्तियों और 9 निधियों का पूरा रहस्य