जानिए तुलना के जाल से बाहर निकलने का सच.............
"क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप पूरे दिन बहुत खुश थे, लेकिन शाम को किसी दोस्त की नई कार या महंगी घड़ी की फोटो देखकर अचानक आपका मूड खराब हो गया? अचानक आपको लगने लगा कि आपकी अपनी ज़िंदगी में कुछ कमी है? अगर हाँ, तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं..."
रोहन और उसकी पुरानी साइकिल
क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप अपनी ज़िंदगी से बहुत खुश हों, लेकिन अचानक किसी दोस्त की नई कार देखकर आपका मन उदास हो जाए? अचानक आपको लगने लगे कि आप ज़िंदगी की दौड़ में पीछे छूट गए हैं?
रोहन के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।
शहर की एक छोटी सी कंपनी में काम करने वाला रोहन बहुत ही मेहनती और खुशमिजाज इंसान था। रोज सुबह अपनी पुरानी साइकिल पर सवार होकर, हल्की ठंडी हवा को महसूस करते हुए ऑफिस जाना उसे बहुत पसंद था। उसके पास एक छोटा सा घर था, प्यारा सा परिवार और शाम को दोस्तों के साथ चाय की टपरी पर हंसने-खिलखिलाने का सुकून। रोहन के लिए यही उसकी सबसे बड़ी दौलत थी।
लेकिन एक शाम, इस हंसती-खेलती जिंदगी में तुलना का ज़हर घुल गया।
ऑफिस में रोहन के साथी करन ने एक ब्रैंड न्यू लग्जरी कार खरीदी थी। पूरे ऑफिस में उसी की चर्चा थी, सब करन को बधाइयां दे रहे थे। रोहन भी दोस्त के लिए खुश था, लेकिन उस शाम जब वह अपनी पुरानी साइकिल के पैडल मारते हुए घर लौट रहा था, तो उसे पहली बार अपनी साइकिल बहुत भारी और पुरानी लगने लगी।
घर पहुंचकर उसने अपनी साइकिल कोने में खड़ी की और उदास होकर बैठ गया। उसके दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी—"करन कितनी आगे निकल गया... उसके पास चमचमाती कार है और मैं आज भी इसी खटारा साइकिल पर घूम रहा हूँ।"
पहली बार रोहन ने अपनी जिंदगी को अपनी खुशियों से नहीं, बल्कि करन की कार से नापना शुरू कर दिया था। उसका सारा सुकून, सारी संतुष्टि एक ही पल में गायब हो गई।
उसकी यह उदासी दादी की नजरों से छुप न सकी। शाम को चाय का कप बढ़ाते हुए दादी ने पूछा, "क्या बात है रोहन? आज चेहरा इतना उतरा हुआ क्यों है?"
रोहन ने भारी मन से कहा, "दादी, मैं दिन-रात इतनी मेहनत करता हूँ, फिर भी मेरे पास एक कार तक नहीं है। मेरे साथ वाले कहाँ से कहाँ पहुँच गए और मैं वहीं का वहीं हूँ।"
दादी हल्के से मुस्कुराईं और उन्होंने कबीर जी का एक प्रसिद्ध दोहा गुनगुनाया:
"दुख में सुमिरन सब करे, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, तो दुख काहे को होय॥"

दादी ने रोहन के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, "रोहन, इंसान की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि वह सुख में शुक्राना करना भूल जाता है। तुम्हारा दुख कार न होने का नहीं है, तुम्हारा दुख यह है कि तुम अपनी जिंदगी को किसी और के चश्मे से देख रहे हो।"
दादी की बातों ने रोहन को सोचने पर मजबूर कर दिया। दादी ने आगे समझाया, "लाइफ तुम्हारा अपना एक्सपीरियंस है, किसी और का नहीं। क्या करन के कार खरीदने से तुम्हारी साइकिल चलना बंद हो गई? या तुम्हारे परिवार का प्यार कम हो गया? नहीं न! तुम्हारी खुशी तब तक पूरी थी जब तक तुमने तुलना नहीं की थी। दूसरों की चमक देखकर अपनी रोशनी को धुंधला मत करो।"
दादी के इन शब्दों ने रोहन के मन का सारा बोझ उतार दिया। उसे अहसास हुआ कि किसी और की तरक्की उसकी नाकामी नहीं थी।
अगली सुबह जब रोहन अपनी साइकिल लेकर निकला, तो हवा में वही पुराना सुकून था। उसने मन ही मन ईश्वर को अपनी अच्छी सेहत, प्यारे परिवार और इस खूबसूरत सुबह के लिए धन्यवाद कहा। आज उसके पास कार भले न थी, पर चेहरे पर एक सच्ची और बेफिक्र मुस्कान लौट आई थी।
आपकी ज़िंदगी आपकी अपनी अनोखी यात्रा है, किसी और का मुकाबला नहीं। सड़क पर चलती चमचमाती गाड़ियाँ देखकर अपनी साइकिल की गति को छोटा मत समझिए—याद रखिए कि आपकी साइकिल आपको उसी ताजी हवा और सुकून का अहसास कराती है, जो शायद बंद शीशों के पीछे किसी को मयस्सर भी न हो।
दूसरों के जीवन के रंगीन पन्नों से अपनी किताब की तुलना करना बंद कीजिए। आपके पास जो अच्छा स्वास्थ्य, सच्चा परिवार, और आज का यह शांत पल है, वही आपकी असली दौलत है।
हर रोज़ उस सब के लिए ईश्वर का धन्यवाद (शुकराना) कीजिए जो आपके पास है। जब आप दूसरों की गाड़ियों से नहीं, बल्कि अपनी खुशियों से अपनी ज़िंदगी को नापना शुरू करेंगे, तो हर सफ़र खूबसूरत और हर दिन सुकून से भरा होगा।
याद रखिए: लाइफ़ आपका अपना अनुभव है, किसी और का देखा हुआ सपना नहीं। अपनी राह पर चलिए, अपनी गति से चलिए, और अपनी खुशियों में मस्त रहिए!
Manu......
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